Friday, 30 December 2016

क्यों हुआ हनुमान जी का विवाह Why marriage of Lord Hanuman

क्यों हुआ हनुमान जी का विवाह :

बताया गया है हनुमानजी सूर्य के शिष्य थे और उनसे शिक्षा प्राप्त करते थे | सूर्य को उन्हें नो विद्या का ज्ञान देना था | ब्रह्मचारी रूप में हनुमानजी ने पाँच विद्या आसानी से सिख ली थी और बची हुई विद्या एक विवाहित ही सिख सकता था अतः सूर्य ने उनसे विवाह करने को कहा |
सूर्य देव ने अपनी परम तपस्वी पुत्री सुवर्चला को हनुमान जी के साथ शादी के लिए तैयार कर लिया। इसके बाद हनुमान जी ने अपनी शिक्षा पूर्ण की और सुवर्चला सदा के लिए अपनी तपस्या में रत हो गई। इस तरह हनुमान जी भले ही शादी के बंधन में बांध गए हो लेकिन शाररिक रूप से वे आज भी एक ब्रह्मचारी ही हैं |

श्री हनुमान चालीसा Shri Hanuman Chalisa



श्री हनुमान चालीसा (Shri Hanuman Chalisa in Hindi)
।।दोहा।।
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार |
बरनौ रघुवर बिमल जसु , जो दायक फल चारि |

बुद्धिहीन तनु जानि के , सुमिरौ पवन कुमार |
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार ||

।।चौपाई।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर |
रामदूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा ||2||

महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी |
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कान्हन कुण्डल कुंचित केसा ||4|

हाथ ब्रज औ ध्वजा विराजे कान्धे मूंज जनेऊ साजे |
शंकर सुवन केसरी नन्दन तेज प्रताप महा जग बन्दन ||6|

विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर |
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया रामलखन सीता मन बसिया ||8||

सूक्ष्म रूप धरि सियंहि दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा |
भीम रूप धरि असुर संहारे रामचन्द्र के काज सवारे ||10||

लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये |
रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई ||12||

सहस बदन तुम्हरो जस गावें अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावें |
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा ||14||

जम कुबेर दिगपाल कहाँ ते कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते |
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा राम मिलाय राज पद दीन्हा ||16||

तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना लंकेश्वर भये सब जग जाना |
जुग सहस्र जोजन पर भानु लील्यो ताहि मधुर फल जानु ||18|

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि जलधि लाँघ गये अचरज नाहिं |
दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ||20||

राम दुवारे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे |
सब सुख लहे तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहें को डरना ||22||

आपन तेज सम्हारो आपे तीनों लोक हाँक ते काँपे |
भूत पिशाच निकट नहीं आवें महाबीर जब नाम सुनावें ||24||

नासे रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा |
संकट ते हनुमान छुड़ावें मन क्रम बचन ध्यान जो लावें ||26||

सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा |
और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे ||28||

चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा |
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे ||30||

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा ||32||

तुम्हरे भजन राम को पावें जनम जनम के दुख बिसरावें |
अन्त काल रघुबर पुर जाई जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ||34||

और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई |
संकट कटे मिटे सब पीरा जपत निरन्तर हनुमत बलबीरा ||36||

जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करो गुरुदेव की नाईं |
जो सत बार पाठ कर कोई छूटई बन्दि महासुख होई ||38||

जो यह पाठ पढे हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा |
तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मँह डेरा ||40||

।।दोहा।।
पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप |
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ||

Thursday, 29 December 2016

Fear of God डर का भगवान

हिन्दू दर्शन यह सिखाता है कि हमारे जीवन में जो घटता है , वह चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक , वो हमारे पूर्व जन्म के किए गए कार्यों का परिणाम होता है। एक चिंताजनक स्थिति स्वयं के द्वारा पैदा किया गया दुर्भाग्य है और भगवान द्वारा दिया गया दंड नहीं है। जीवन स्वयं, जो द्वंद के दायरे में घट रहा है, प्राकृतिक शक्तियों के खेल का एक मैदान है , एक कक्षा है शरीर को धारण किए हुए आत्माओं की जो आनंद और दुख का , उत्साह और अवसाद , सफलता और विफलता, स्वास्थ्य और बीमारी , अच्छे और बुरे समय का अनुभव करते हैं.वे आध्यात्मिक प्राणी जो चेतना के गहरे स्तरों में रहते हैं , शरीर में रहने वाली आत्माओं को संसार की यात्रा के दौरान सहायता देनें के लिए सदेव उपलब्ध रहते हैं। पुजा अनुष्ठान उन्हें संतुष्ट करने या उनके गुस्से को शांत करने हेतु नहीं किए जाते बल्कि उनके प्रति प्रेम व्यक्त करने एवं उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेने का आवाहन करने हेतु किए जाते हैं.
अनुष्ठान द्वारा तुष्टीकरण का एक शास्त्रीय उद्देश्य भी है , नकारात्मक ऊर्जाओं और नक्षत्रीय संस्थाओं से बचाया जाए जो सचमुच में शरीर में रहने वाली आत्माओं के जीवन को परेशान करती हैं। गुरुदेव नें सिखाया कि ऐसे दुष्ट प्राणियों से बचने का अच्छा तरीका है एक सकारात्मक आध्यात्मिक बल का निर्माण जो कि उच्च और अधिक शक्तिशाली उदार प्राणियों के आव्हान द्वारा प्राप्त किया जा सकता है - जो कि हिंदूइज़्म के भगवान हैं। नक्षत्रीय संस्थाएं वहाँ शक्ति विहीन होती हैं जहां सामंजस्य, स्वच्छता एवं भगवानों एवं देवताओं से करीबी एकात्मता होती है।
उसी यात्रा के दौरान एक किशोर लड़के नें, उत्सुकता पूर्वक झुकते हुए पूछा, " क्या मंदिर में मुझे सभी देवताओं की पूजा करनी होगी या में केवल भगवान गणेश पर ध्यान केंद्रित कर सकता हूँ ? मैं यह पा रहा हूँ की केवल एक पर ध्यान केंद्रित करने से मैं उनके काफी करीब पहुँच रहा हूँ। मैं एक ऐसे संबंध बनाने की शुरुआत कर रहा हूँ जैसा मेरा किसी और देवता के साथ नहीं हुआ."
मेंनै हाँ में जवाब दिया, क़ि एक देवता पर ध्यान केंद्रित करना ठीक है। दरअसल , ज्यादातर हिन्दू इसी ढर्रे के पीछे चलते हैं। हालांकि , यह उचित होगा कि जब हम मंदिर में हों तो सभी देवताओं को सम्मानित एवं स्वीकृत करें। मेंनै कहा, "जब किसी दूसरे देवता कि पूजा में शामिल हों , निष्ठा पूर्वक पूजा करें और गहरा सम्मान दिखाएँ , पर आपको उस देवता के उतने नजदीक जाने के प्रयास की जरूरत नहीं जितना के आप भगवान गणेश के हैं."

gautam buddha गौतम बुद्ध धम्म-अ-धम्म

बुद्ध के अनुसार धम्म है: -
  • जीवन की पवित्रता बनाए रखना
  • जीवन में पूर्णता प्राप्त करना
  • निर्वाण प्राप्त करना
  • तृष्णा का त्याग
  • यह मानना कि सभी संस्कार अनित्य हैं
  • कर्म को मानव के नैतिक संस्थान का आधार मानना
बुद्ध के अनुसार अ-धम्म है: -
  • परा-प्रकृति में विश्वास करना
  • आत्मा में विश्वास करना
  • कल्पना-आधारित विश्वास मानना
  • धर्म की पुस्तकों का वाचन मात्र

Saturday, 10 December 2016

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33 crore devi devta name



  • તેઓ Vasus કહેવાય કારણ કે તેઓ કે જીવન, ચાલ અથવા અસ્તિત્વમાં બધા ધામ છે. (પણ મહાભારત માં તમારો ઉલ્લેખ કર્યો છે, 1/66/18)
    
     
    
     Rudras ~ દસ Pranas (Praana, Apaana, Vyaana, Samaana, Udaana, નાગ, મકાન, Krikal, Devadutta અને ધનંજયા), અર્થાત nervauric દળો કે જે માનવ શરીરમાં રહે છે. અગિયારમું માનવ આત્મા છે. આ 'Rudras' કારણ કે જ્યારે તેઓ શરીર રણ, તે મૃત બની જાય છે અને મૃત સંબંધો, કહેવામાં આવે છે પરિણામે, રુદન શરૂ થાય છે.
    
    રુદ્ર જે એક વ્યક્તિ રુદન કરવા માટે બનાવે છે એનો અર્થ એ થાય. {પણ Harivansha 13 / 51-52 ઉલ્લેખ})
    
     
    
     Adityaas --- એક વર્ષ Adityaas કહેવાય બાર મહિના, તેઓ દરેક વસ્તુના અસ્તિત્વ કે હોવાની શબ્દ વિરામ કારણ બને છે. (પણ મહાભારત માં ઉલ્લેખ કર્યો છે)
    
     
    
     ઇન્દ્ર જે પણ, કારણ કે તે મહાન બળ ઉત્પાદક છે (તમામ વ્યાપી) વીજળી તરીકે ઓળખાય છે.
    
     
    
     Prajaapati, પણ "Yajna" કહેવાય છે, કારણ કે તે હવા, પાણી, વરસાદ અને શાકભાજી શુદ્ધિકરણ દ્વારા માનવજાત લાભ અને કારણ કે તે વિવિધ આર્ટસ વિકાસ સાધનો, અને તે સન્માન વિદ્વાન અને મુજબના માટે આપવામાં આવે છે.
    
     
    
    આ 33 devatas માસ્ટર મહાદેવ અથવા ઈશ્વર એકલા શતપથ બ્રાહ્મણ 14 Kanda મુજબ પૂજા કરવામાં આવે છે.

33 crore devi devta

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pramukh swami

jay swaminarayan

tu mane bhagwan ek vardan aapi de

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