हिन्दू दर्शन यह सिखाता है कि हमारे जीवन में जो
घटता है , वह चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक , वो हमारे पूर्व जन्म के किए
गए कार्यों का परिणाम होता है। एक चिंताजनक स्थिति स्वयं के द्वारा पैदा
किया गया दुर्भाग्य है और भगवान द्वारा दिया गया दंड नहीं है। जीवन स्वयं,
जो द्वंद के दायरे में घट रहा है, प्राकृतिक शक्तियों के खेल का एक मैदान
है , एक कक्षा है शरीर को धारण किए हुए आत्माओं की जो आनंद और दुख का ,
उत्साह और अवसाद , सफलता और विफलता, स्वास्थ्य और बीमारी , अच्छे और बुरे
समय का अनुभव करते हैं.वे आध्यात्मिक प्राणी जो चेतना के गहरे स्तरों में
रहते हैं , शरीर में रहने वाली आत्माओं को संसार की यात्रा के दौरान सहायता
देनें के लिए सदेव उपलब्ध रहते हैं। पुजा अनुष्ठान उन्हें संतुष्ट करने या
उनके गुस्से को शांत करने हेतु नहीं किए जाते बल्कि उनके प्रति प्रेम
व्यक्त करने एवं उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेने का आवाहन करने हेतु किए
जाते हैं.
अनुष्ठान द्वारा तुष्टीकरण का एक शास्त्रीय
उद्देश्य भी है , नकारात्मक ऊर्जाओं और नक्षत्रीय संस्थाओं से बचाया जाए जो
सचमुच में शरीर में रहने वाली आत्माओं के जीवन को परेशान करती हैं।
गुरुदेव नें सिखाया कि ऐसे दुष्ट प्राणियों से बचने का अच्छा तरीका है एक
सकारात्मक आध्यात्मिक बल का निर्माण जो कि उच्च और अधिक शक्तिशाली उदार
प्राणियों के आव्हान द्वारा प्राप्त किया जा सकता है - जो कि हिंदूइज़्म के
भगवान हैं। नक्षत्रीय संस्थाएं वहाँ शक्ति विहीन होती हैं जहां सामंजस्य,
स्वच्छता एवं भगवानों एवं देवताओं से करीबी एकात्मता होती है।
उसी यात्रा के दौरान एक किशोर लड़के नें, उत्सुकता
पूर्वक झुकते हुए पूछा, " क्या मंदिर में मुझे सभी देवताओं की पूजा करनी
होगी या में केवल भगवान गणेश पर ध्यान केंद्रित कर सकता हूँ ? मैं यह पा
रहा हूँ की केवल एक पर ध्यान केंद्रित करने से मैं उनके काफी करीब पहुँच
रहा हूँ। मैं एक ऐसे संबंध बनाने की शुरुआत कर रहा हूँ जैसा मेरा किसी और
देवता के साथ नहीं हुआ."
मेंनै हाँ में जवाब दिया, क़ि एक देवता पर ध्यान
केंद्रित करना ठीक है। दरअसल , ज्यादातर हिन्दू इसी ढर्रे के पीछे चलते
हैं। हालांकि , यह उचित होगा कि जब हम मंदिर में हों तो सभी देवताओं को
सम्मानित एवं स्वीकृत करें। मेंनै कहा, "जब किसी दूसरे देवता कि पूजा में
शामिल हों , निष्ठा पूर्वक पूजा करें और गहरा सम्मान दिखाएँ , पर आपको उस
देवता के उतने नजदीक जाने के प्रयास की जरूरत नहीं जितना के आप भगवान गणेश
के हैं."